कर्मभूमि - प्रेमचंद

This quote was added by rahulknp
समरकान्त के घाव पर जैसे नमक पड़ गया। बोले-यह आज नई बात मालूम हुई। तब तो तुम्हारे ऋषि होने में कोई संदेह नहीं रहा, मगर साधन के साथ कुछ घर-गृहस्थी का काम भी देखना होता है। दिन-भर स्कूल में रहो, वहां से लौटो तो चरखे पर बैठो, रात को तुम्हारी स्त्री-पाठशाला खुले, संध्‍या समय जलसे हों, तो घर का धंधा कौन करे- मैं बैल नहीं हूं। तुम्हीं लोगों के लिए इस जंजाल में फंसा हुआ हूं।.

Train on this quote


Rate this quote:
3.3 out of 5 based on 2 ratings.

Edit Text

Edit author and title

(Changes are manually reviewed)

or just leave a comment:


Test your skills, take the Typing Test.

Score (WPM) distribution for this quote. More.

Best scores for this typing test

Name WPM Accuracy
aishwary_varanasi 41.54 82.6%
jivan 23.67 76.1%
aarti2505 8.24 81.1%
xabaghel 0.00 4.2%
lahna_singh 0.00 5.0%

Recently for

Name WPM Accuracy
aarti2505 8.24 81.1%
lahna_singh 0.00 5.0%
xabaghel 0.00 4.2%
aishwary_varanasi 41.54 82.6%
jivan 23.67 76.1%