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reddit
Yeah, like the other commenter said, this is an incomplete sentence. Also, this definition was ...

Scrubs - Season 1
ooo bad word

Nicola Yoon
well... damn just let that sink in right there when your typing or reading this ...

The Absolute Master of Typing
how do you call yourself a master of typing when you barely type 80 wpm. ...

Mikhail Bulgakov
gold digger

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Recent quotes - Best quotes - Worst quotes -

N A
yadav - ex 4
सच तो यह है कि बड़ी संख्या में आतंकवादी गिरोहों का दारोमदार नशे के कारोबार पर ही टिका हुआ है, क्योंकि इन्हें अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत होती है, जो वैध तरीके से इन्हें मिल ही नहीं सकते और अवैधानिक तरीकों से इन्हें हासिल करने के लिए, इन्हें बहुत अधिक धन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अपने गिरोह में शामिल करने के लिए इन्हें रोज़ नए-नए युवाओं की जरूरत होती है। सब्जबाग दिखाने के लिए भी ज़रूरी है कि पहले उन्हें कुछ धन मुहैया कराया जाए, जो किसी सही काम से नहीं प्राप्त हो सकता। अवैधानिक तरीके से बड़ी.

N A
yadav - ex 3
धार्मिक स्थानों और पारिवारिक उत्सवों में भी, ये लोग कम ही नज़र आते हैं। हम ऐसे लोगों के अनुभवों के बारे में लगभग कुछ नहीं जानते। विकलांग ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों के बारे में तो हमें कुछ भी ज्ञात नहीं कि उनकी जिंदगी कैसी है उन्हें किन-किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है इन शारीरिक रूप में अक्षम लोगों को अपने जीवन में विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है। गांवों में सड़कों, पेयजल के स्रोतों और स्कूल भवनों की दूरी उनके लिए मुश्किल का कारण बन जाती है।.

N A
yadav - ex 2
माना जाता है कि शिक्षीत व्यक्ति सूचना और ज्ञान से समृद्ध होता है। इस लिए वह ज्यादा बुद्धीमान, विवेकी, निष्पक्ष, समझदार, दयालु, संवेदनशील, परवाह करने और साथ निभानेवाला, पूर्वग्रहों, पक्षपात, रूढ़ि परम्पराओं से मुक्त यानि प्रबुद्ध होता है। इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है, जिसमें शिक्षीत और ज्ञानी लोगों ने तर्कहीन, अन्यायपूर्ण और अनुचित ढंग से काम किया, जो संघर्ष, तनाव, अन्याय, शोषण और उत्पीड़न का कारण बना। जब रोमन साम्राज्य चरम पर था, तो इटली में दास प्रथा काफी फली-फूली।.

N A
yadav - ex 1
एक समुराई जिसे उसके शौर्य, इमानदारी और सज्जनता के लिए जाना जाता था, एक जेन सन्यासी से सलाह लेने पहुंचा। जब सन्यासी ने ध्यान पूर्ण कर लिया तब समुराई ने उससे पूछा, मैं इतना हीन क्यों महसूस करता हूं मैंने कितनी ही लड़ाइयां जीती हैं, कितने ही असहाय लोगों की मदद की है। पर जब मैं और लोगों को देखता हूं तो लगता है कि मैं उनके सामने कुछ नहीं हूं, मेरे जीवन का कोई महत्त्व ही नहीं है। रुको य जब मैं पहले से एकत्रित हुए लोगों के प्रश्नों का उत्तर दे लूंगा तब तुमसे बात करूंगा, सन्यासी ने जवाब दिया।.

N A
आव्या यादव - संस्कृति ज्ञान 1
कहते है कि माता के चरणों में स्वर्ग होता है। तो आप ही बताईए जिसके चरणों में स्वर्ग हो वह किसी देवता से कम होगा क्या? और यदि आप किसी देवता का अपमान कर दोगे तो ईश्वर आपको क्षमा कर सकता है। नहीं है ना? इसलिए आपनी माता को ईश्वर की भाँति पूजा करों। माता-पिता कोई वस्तु नहीं होते जिन्हें समय के साथ छोड़ दिया जाए वह हमारी आत्मा होते हैं। उन्हें कभी दुःख मत देना वह आपके ईश्वर है।.

N A
Aavya abhi - हमारी संस्कृति
यदि आप किसी गन्दे नाले के पास चलोगे तो छींटे आए या ना आए पर बदबू अवश्य आएगी, अर्थात् यदि आप किसी असभ्य, अनुचित काम करने वाले गन्दे व्यक्ति के साथ रहोगे तो उसका असर आए या ना आए पर आपके चरित्र को अवश्य गलत बना सकता है। इसलिए आपको हर गन्द चीज से बचना चाहिए। जैसे वह व्यक्ति हो या कोई वस्तु । यदि आप किसी का मृत शरीर देखलो तो आपको रात को उसका दृश्य अवश्य आएगा इसलिए गलत व अनुचित चीजों का प्रभाव भी ऐसे ही मृत शरीर के दृश्य की भाँति असर पड़ता है। अनुचित चीजों से बचो।.

N A
आव्या यादव - सूचना का अधिकार
भारत एक लोकतान्त्रिक देश है जहाँ प्रत्येक नागरिक को सभी प्रकार की गतिविधियों से सम्बन्धित सूचनाएँ जानने का अधिकार है। सूचना का अर्थ, किसी भी स्वरूप में कोई भी सामग्री, जिसके अन्तर्गत इलेक्ट्रॉनिक रूप से धारित अभिलेख, दस्तावेज, विज्ञापन, ई-मेल, मत सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, संविदा, रिपोर्ट, कागज-पत्र, नमूने, मॉडल, आँकड़ों सम्बन्धी सामग्री इत्यादि शामिल हैं, सूचना कहलाती है। आटीआई अर्थात् राइट टू इन्फॉर्मेशन जिसे हिन्दी में सूचना का अधिकार कहते हैं।.

N A
आव्या यादव - आवश्यक शब्द
राष्ट्रीय विशिष्ट संख्या परिवर्तन वैश्वीकरण नेटवर्किंग रियलिटी आतंकवाद आन्तरिक नक्सलवाद अपमिश्रण संयुक्त-राष्ट्र-संघ गुटनिरपेक्षता भ्रूण-हत्या? प्रासंगिकता साम्प्रदायिकता "जाति-प्रथा" अन्धविश्वास सशक्तीकरण बाल-श्रम 'आरक्षण-नीति' भ्रष्टाचार! पर्यटन। औद्योगीकरण? आर्थिक सर्वशिक्षा रोजगारोन्मुखी पर्यावरणीय-प्रदूषण क्लोनिंग! प्रौद्योगिकी-विकास, ओलम्पिक संस्करण। आत्मनिर्भरता 'वृक्षारोपण' पारिस्थिकी, साहित्यिक, स्वच्छन्द-गति चिकित्सालय-स्थिति।.

N A
आव्या यादव - गुटनिरपेक्षता
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व दो गुटों में बँट गया था। पहला गुट समाजवादी व्यवस्था के पोषक सोवियत संघ का था एवं दूसरा गुट पूँजीवादी व साम्राज्यवादी व्यवस्था के पोषक संयुक्त राज्य अमेरिका का। दोनों शक्तियों के मध्य कटुता, तनाव एवं वैमनस्य ने विश्व में भय, अविश्वास एवं तनाव का माहौल पैदा कर दिया था। इससे शीत युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। तब दोनों महाशक्तियों ने विश्व के नव स्वतन्त्र देशों को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास शुरू कर दिया।.

विमलेश मौर्य - युद्ध
तीसरा विश्‍व युद्ध ये एक ऐसा शब्‍द है जो आए दिए हम सभी का आकर्षण अपनी ओर खींचता रहता है। और कई परमाणु समृद्ध देशों के बीच हो रही लगातार तना-तनी को देखते हुए काफी करीब भी माना जा रहा है। अभी हाल ही में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में इमारत के निर्माण के दौरान दूसरे विश्‍व युद्ध का एक बम बरामद किया गया जिसके बाद तत्‍काल प्रभात से वहां के नागरिकों को शहर खाली करने का आदेश दिया गया। हालाकि बम के नाकाम होने के बाद दोबारा लोग वापस आ गए।.

N A
रविकांत - अभ्यास
खादी ग्रामोद्योग हमारी ग्रामीण अर्थव्यस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है । यह उद्योग जहां एक ओर हमारी राष्ट्रीयता की पुनीत भावनाओ से जुड़ा है और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम्य विकास की मौलिक विचारधारा को प्रतिबिम्बित करता है , वहीं गावों के लाखों निर्धन तथा निर्बल वर्गों के लोगो के लिए रोजगार का सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सरल माध्यम है । खादी ग्रामोद्योग का व्यापक प्रसार कर तथा सम्पूर्ण ग्रामीण अंचल में इसका जाल बिछाकर बहुत बड़ी सीमा तक वर्तमान बेरोजगारी की समस्या का समाधान किया जा सकता है ।.

रविकांत - इन्द्र की पोशाक
एक सीधे-साधे सरल स्वाभाव के राजा थे । उनके पास एक आदमी आया जो बहुत होशियार था उसने राजा से कहा कि अन्नदाता ! आप देश की पोशाक पहनते हो । परन्तु आप राजा हो , आपको तो इन्द्र की पोशाक पहननी चाहिए राजा बोला इंद्र की पोशाक ? वह आदमी बोला हाँ आप स्वीकार करो तो हम लाकर देदें । राजा बोला अच्छा ले आओ । हम इंद्र की पोशाक पहनेंगे । पहले आप एक लाख रुपये देदे वह आदमी बोला , बाकी रुपये बाद मे दे दें , तभी इंद्र की पोशाक आयेगी । राजन ने रुपये दे दिये । दूसरे दिन वह आदमी एक बहुत बढ़िया चमचमाता हुआ.

रविकांत - बुद्धिमान खरगोश
एक वन में भारसुक नामक एक सिंह रहता था । वह अत्यंत शक्तिशाली था। वह बल के मद में वन्य-पशुओ का अकारण ही वध किया करता था। बहाना क्षुधा- पूर्ती का बनाता था। बलशाली की क्षुधा भी उसके बल के समान ही बड़ी होती है। भारसुक ही जैसे -जैसे बलवान बनता जा रहा था, उसका अत्याचार भी बढ़ता जा रहा था। उससे पीड़ित वन्य पशुओ नें आपस में विचार करने का निर्णय लिया कि सिंह को प्रतिदिन एक पशु भोजन के लिए दिया जाए, इससे व्यर्थ नें संहार तो ना हो।.

प्रेमचंद - कर्मभूमि
समरकान्त के घाव पर जैसे नमक पड़ गया। बोले-यह आज नई बात मालूम हुई। तब तो तुम्हारे ऋषि होने में कोई संदेह नहीं रहा, मगर साधन के साथ कुछ घर-गृहस्थी का काम भी देखना होता है। दिन-भर स्कूल में रहो, वहां से लौटो तो चरखे पर बैठो, रात को तुम्हारी स्त्री-पाठशाला खुले, संध्‍या समय जलसे हों, तो घर का धंधा कौन करे- मैं बैल नहीं हूं। तुम्हीं लोगों के लिए इस जंजाल में फंसा हुआ हूं।.

N A
प्रेमचंद - कर्मभूमि
मकान था तो बहुत बड़ा मगर निवासियों की रक्षा के लिए उतना उपयुक्त न था, जितना धान की रक्षा के लिए। नीचे के तल्ले में कई बड़े-बड़े कमरे थे, जो गोदाम के लिए बहुत अनुकूल थे। हवा और प्रकाश का कहीं रास्ता नहीं। जिस रास्ते से हवा और प्रकाश आ सकता है, उसी रास्ते से चोर भी तो आ सकता है। चोर की शंका उसकी एक-एक ईंट से टपकती थी। ऊपर के दोनों तल्ले हवादार और खुले हुए थे।.

N A
प्रेमचंद - कर्मभूमि
विवाह हुए दो साल हो चुके थे पर दोनों में कोई सामंजस्य न था। दोनों अपने-अपने मार्ग पर चले जाते थे। दोनों के विचार अलग, व्यवहार अलग, संसार अलग। जैसे दो भिन्न जलवायु के जंतु एक पिंजरे में बंद कर दिए गए हों। हां, तभी अमरकान्त के जीवन में संयम और प्रयास की लगन पैदा हो गई थी। उसकी प्रकृति में जो ढीलापन, निर्जीवता और संकोच था वह कोमलता के रूप में बदलता जाता था। विद्याभ्यास में उसे अब रुचि हो गई थी।.

N A
ककककककक - कककककक
अमरकान्त की अवस्था उन्नीस साल से कम न थी पर देह और बुध्दि को देखते हुए, अभी किशोरावस्था ही में था। देह का दुर्बल, बुध्दि का मंद। पौधे को कभी मुक्त प्रकाश न मिला, कैसे बढ़ता, कैसे फैलता- बढ़ने और फैलने के दिन कुसंगति और असंयम में निकल गए। दस साल पढ़ते हो गए थे और अभी ज्यों-त्यों आठवें में पहुंचा था। किंतु विवाह के लिए यह बातें नहीं देखी जातीं। देखा जाता है धान, विशेषकर उस बिरादरी में, जिसका उ?म ही व्यवसाय हो।.

N A
रररररररररर - गगगगगगग
नैना की सूरत भाई से इतनी मिलती-जुलती थी, जैसे सगी बहन हो। इस अनुरूपता ने उसे अमरकान्त के और भी समीप कर दिया था। माता-पिता के इस दुर्वव्‍यहवार को वह इस स्नेह के नशे में भुला दिया करता था। घर में कोई बालक न था और नैना के लिए किसी साथी का होना अनिवार्य था। माता चाहती थीं, नैना भाई से दूर-दूर रहे। वह अमरकान्त को इस योग्य न समझती थीं कि वह उनकी बेटी के साथ खेले।.

बबबबबबब - बबबबबबब
खैरियत यह हुई कि उसके कोई सौतेला भाई न हुआ। नहीं शायद वह घर से निकल गया होता। समरकान्त अपनी संपत्ति को पुत्र से ज्यादा मूल्यवान समझते थे। पुत्र के लिए तो संपत्ति की कोई जरूरत न थी पर संपत्ति के लिए पुत्र की जरूरत थी। विमाता की तो इच्छा यही थी कि उसे वनवास देकर अपनी चहेती नैना के लिए रास्ता साफ कर दे पर समरकान्त इस विषय में निश्चल रहे। मजा यह था कि नैना स्वयं भाई से प्रेम करती थी, और अमरकान्त के हृदय में अगर घर वालों के लिए कहीं कोमल स्थान था, तो वह नैना के लिए था।.

प्रेमचंद - कर्मभूमि
मगर कभी-कभी बुराई से भलाई पैदा हो जाती है। पुत्र सामान्य रीति से पिता का अनुगामी होता है। महाजन का बेटा महाजन, पंडित का पंडित, वकील का वकील, किसान का किसान होता है मगर यहां इस द्वेष ने महाजन के पुत्र को महाजन का शत्रु बना दिया। जिस बात का पिता ने विरोध किया, वह पुत्र के लिए मान्य हो गई, और जिसको सराहा, वह त्याज्य। महाजनी के हथकंडे और षडयंत्र उसके सामने रोज ही रचे जाते थे। उसे इस व्यापार से घृणा होती थी।.